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कमर और गर्दन में नसों का दबना और फिज़ियोथेरेपी : डॉ पाईवाल आजकल, पूरी दुनिया मे दर्द के डॉक्टरो के पास सबसे ज्यादा मरीज हैं कमर या गर्दन दर्द, कमर, कुल्हे, पैर, गर्दन, कंधे, पीठ या हाथ मे दर्द, सुन्नता, झन्झनाहट और कमजोरी के । लगभग हर घर में एक से दो लोग ऐसे हैं जिन्हे कभी कमर या गर्दन में दर्द होता हैं तथा घुटनो मे दर्द होता है । यह दर्द बिना चोट के चालू होते हैं और फिर धीरे धीरे समय के साथ बढ़ते जाते हैं । किसी काम या थकान के बाद ज्यादा होते हैं । दवाईयों और आराम से कुछ समय थोडा आराम मिलता हैं । बिना चोट के ऐसे हर मरीज़ को दर्द से पुर्ण राहत देने और उन्हे वापस अपनी दर्द रहित दैनिक जीवनचर्या करने लायक बनाने के लिये ही फिज़ियोथेरेपी चिकित्सा की शुरुआत हुई । फिज़ियोथेरेपी की एक शाखा, "इलेक्ट्रोथेरेपी" मे मरीज़ के दर्द करने वाले अंग की चमडी के ऊपर से गहरे तक गर्मी पहुचने वाले सेक ( टेकार और क्लास 4 लेज़र ) द्वारा टूटी हुई कोशिकाओं को वापस बनाने और सुजन उतारने का काम किया जाता हैं तथा सेगमेंटल डी- कम्प्रेशन ट्रेकशन से दबी हुई नसों का दबाव खोलकर मरीज़ को जकड़न, खिंचाव, दर्द, सुजन, सुन्नता, जलन और झन्झनाहट से पुर्ण आराम दिया जाता हैं । फिजियोथेरेपी से ईलाज मे कुछ दिन रोज डॉक्टर के पास आना पडता है । धीरे धीरे टूटे हुए उत्तको को भर कर तकलीफ से पुर्ण आराम दिया जाता हैं । इस चिकित्सा पद्धति से काफी सारे दर्द के मरीजों को या तो ओप्रेशन से बचाया जा सकता है या उसे टाला जा सकता है । इस ईलाज मे कुछ बिन्दू ध्यान रखने जरूरी है, जैसे मरीज़ की उम्र, मधुमेह, उक्त रक्तचाप, दर्द की अवधी और सबसे जरुरी हैं दर्द का कारण ढूढना, जो की एक कुशल फिज़ियोथेरेपिस्ट का काम है ।